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BSER 12th Physics Lesson -11 “किरण प्रकाशिकी ( Ray Optics ) ” Part-1

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अध्याय “किरण प्रकाशिकी ( Ray Optics ) ” बाकी के topics  के link आपको page के नीचे मिल जायेंगे | Check Out Below RBSE Class 12 Physics Notes in Hindi…

BSER 12th Physics Lesson -11 किरण प्रकाशिकी ( Ray Optics )

#प्रकाश का परावर्तन (Reflection of light):-

जब प्रकाश (light) की कोई किरण ( Ray ) एक माध्यम ( Medium )से दुसरे माध्यम ( Medium ) को पृथक करने वाली परावर्तक पृष्ठ ( Reflector Page ) से टकराकर वापस उसी माध्यम ( Medium ) में लौट जाती है , तो प्रकाश (light) की इस घटना को प्रकाश का परावर्तन ( Reflection of light) कहते हैं |

BSER/12th/Lesson -11"किरण प्रकाशिकी ( Ray Optics ) " part-1#परावर्तन के नियम ( Rules of reflection ):-

( i ) प्रकाश के परावर्तन (Reflection of light) की घटना में आपतन कोण (Incidence Angle ) ( <i ) एवं परावर्तन कोण (Reflection angle) ( <r )  के मान (Values)बराबर होते हैं |

अर्थात  <i = <r ,जहाँ  {  <i = आपतन कोण ,<r = परावर्तन कोण }

( ii ) प्रकाश के परावर्तन (Reflection of light)  की घटना में आपतित प्रकाश किरण ,अभिलम्ब व परावर्तित प्रकाश किरण हमेशा एक तल में होते हैं

Note :- परावर्तन की घटना में आपतित एवं परावर्तित प्रकाश किरण की आवृत्ति ( frequency ) तरंग दैर्ध्य ( Wavelength ) एवं चाल ( momentum )अपरिवर्तित रहती हैं  | परन्तु परावर्तित प्रकाश किरण की तीव्रता ( Intensity )के मान में कुछ कमी आती हैं |

# समतल दर्पण ( plane mirror ) :-

समतल दर्पण ( plane mirror )

चित्रानुसार समतल दर्पण ( plane mirror )के द्वारा प्रतिबिम्ब के निर्माण की प्रक्रिया को समझने के लिए समतल दर्पण के सामने बिंदु P पर एक वस्तु लेते हैं | इस बिंदु P से आने वाली प्रकाश की किरणें PO व PO’ समतल दर्पण से परावर्तित ( Reflected )होकर OR व O’R’ दिशा में संचरित होती हैं |

परावर्तित प्रकाश किरणें OR व O’R’ को पीछे की तरफ बढ़ाने पर ये बिंदु P’ पर एक-दुसरे को प्रतिछेद करती हुवी प्रतीत होती हैं | अर्थात इस बिंदु पर वस्तु का प्रतिबिम्ब बनता हैं | “समतल दर्पण द्वारा बने इस प्रतिबिम्ब की प्रकृति आभासी ( काल्पनिक ) , सीधा एवं अनावर्धित होती हैं |”

  • समतल दर्पण द्वारा बने प्रतिबिम्ब की दर्पण से दुरी ,वस्तु की दर्पण से दुरी के बराबर होती हैं |

# गोलीय दर्पण ( Spherical mirror ) :-

गोलीय दर्पण ऐसे दर्पण होते हैं ,जिनको किसी खोखले (Hollow ) कांच के गोले (Glass shells
)को काट कर बनाया जाता हैं अर्थात गोलीय दर्पण किसी कांच के खोखले गोले (Hollow balls) के कटे हुवे भाग होते हैं | जिनकी एक सतह पर रजत (Silver) की पोलिश कर दी जाती हैं

गोलीय दर्पण मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं –

( i ) अवतल दर्पण ( अभिसारी दर्पण ) (concave mirror)

( ii ) उत्तल दर्पण  ( अपसारी ) (Convex mirror)

( i ) अवतल दर्पण ( अभिसारी दर्पण ) :-

अवतल दर्पण ( अभिसारी दर्पण )ऐसे गोलीय दर्पण (Spherical mirror )जो मुख्य अक्ष के समान्तर आपतित प्रकाश की किरणों को फोकस बिंदु (Focus point )पर अभिसारित (Converged) ( इकट्ठा करना ) कर देते हैं ,अवतल दर्पण (concave mirror) कहलाते हैं |

अवतल दर्पण बनाने के लिए गोलीय पृष्ठ (Spherical page) की उभरी हुवी सतह पर रजत (Silver) की पोलिश (Polish) की जाती हैं |

( ii ) उत्तल दर्पण  ( अपसारी ) :-

उत्तल दर्पण ( अपसारी )ऐसे गोलीय दर्पण जो मुख्य अक्ष के समान्तर आपतित (Disaster) प्रकाश की किरणों को फोकस बिंदु पर अपसारित (फैलाना  ) कर देते हैं ,उत्तल  दर्पण कहलाते हैं |

अवतल दर्पण बनाने के लिए गोलीय पृष्ठ की अन्दर वाली  सतह पर रजत की पोलिश की जाती हैं |

# गोलीय दर्पण से सम्बन्धित महत्वपूर्ण बिंदु एवं परिभाषाए :-

( i ) द्वारक :-

गोलीय दर्पण के वृताकार चाप को दर्पण का द्वारक कहते हैं |

गोलीय दर्पण से सम्बन्धित महत्वपूर्ण बिंदु एवं परिभाषाए

( ii ) ध्रुव (Pole) :-

गोलीय दर्पण के द्वारक का मध्य बिंदु उस दर्पण का ध्रुव कहलाता हैं | इसे P” से व्यक्त किया जाता हैं |

( iii ) वक्रता केंद्र (Center of curvature):-

गोलीय दर्पण जिस खोखले गोले Hollow balls के कटे भाग होते हैं , उस खोखले गोले के केंद्र को गोलीय दर्पण का वक्रता केंद्र कहते हैं | इसे “C” से व्यक्त किया जाता हैं |

( iv ) वक्रता त्रिज्या (radius of curvature) :-

गोलीय दर्पण जिस खोखले गोले के कटे भाग होते हैं , उस खोखले गोले की त्रिज्या को गोलीय दर्पण की  वक्रता त्रिज्या  कहते हैं | इसे “R” से व्यक्त किया जाता हैं |

( v ) मुख्य अक्ष (Main axis) :-

गोलीय दर्पण के ध्रुव व वक्रता केंद्र को मिलाने वाली सीधी रेखा गोलीय दर्पण की मुख्य अक्ष कहलाती हैं | इसे xx‘ से व्यक्त किया जाता हैं |

( vi ) फोकस बिन्दु (focus point) :-

मुख्य अक्ष के समान्तर आपतित प्रकाश की किरणे परावर्तन के पश्चात जिस बिंदु पर प्रतिछेद (Peripheral) करती हैं या प्रतिछेद करती हुवी प्रतीत होती हैं , वह बिन्दु गोलीय दर्पण का फोकस बिन्दु कहलाता हैं | इसे “F” से व्यक्त किया जाता हैं |

# चिन्ह परिपाटी (Sign pattern) :-

गोलीय सतह से अपवर्तन (Refraction) या परावर्तन (Reflection) की घटना में एक चिन्ह परिपाटी काम में ली जाती हैं , जो निम्न प्रकार हैं –

चिन्ह परिपाटी (Sign pattern)

( i ) गोलीय सतह के ध्रुव को मूल बिन्दु एवं मुख्य अक्ष को X-Axis मानते हुवे आपतित प्रकाश किरण की दिशा में मापी गयी दूरियों को धनात्मक (Positive) माना जाता हैं एवं आपतित किरण की विपरीत दिशा में मापी गयी दूरियों को ऋणात्मक (Negative) माना जाता हैं |

( ii ) मुख्य अक्ष के लम्बवत ऊपर की ओर मापी गयी दूरियों को धनात्मक एवं मुख्य अक्ष के लम्बवत नीचे की ओर मापी गयी दूरियों को ऋणात्मक माना जाता हैं |

  • अवतल दर्पण में फोकस दुरी एवं बिम्ब की दुरी हमेशा ऋणात्मक होती हैं |
  • उत्तल दर्पण में फोकस दुरी ( f ) एवं प्रतिबिम्ब की दुरी ( v ) हमेशा धनात्मक होती हैं परन्तु बिम्ब की दुरी ( u ) हमेशा ऋणात्मक होती हैं |

# गोलीय दर्पण द्वारा प्रतिबिम्ब का बनना :-

 

गोलीय दर्पण द्वारा प्रतिबिम्ब निर्माण के लिए निम्न नियमो को काम में लिया जाता हैं |

( i ) मुख्य अक्ष के समान्तर आपतित प्रकाश की किरण परावर्तन के पश्चात दर्पण के फोकस बिंदु से गुजरती हैं या गुजरती हुवी प्रतीत होती हैं |

गोलीय दर्पण द्वारा प्रतिबिम्ब का बनना

( ii ) दर्पण के फोकस बिंदु से आने वाली प्रकाश की किरण या दर्पण के फोकस बिंदु से आती हुवी प्रतीत होने वाली प्रकाश किरण परावर्तन के पश्चात मुख्य अक्ष के समान्तर संचरित होती हैं |

गोलीय दर्पण द्वारा प्रतिबिम्ब का बनना

Note :- 

  1. यदि दो परावर्तित किरणें वास्तव में किसी बिंदु पर प्रतिछेद करती हैं तो इनके द्वारा वास्तविक प्रतिबिम्ब का निर्माण होता हैं | वास्तविक प्रतिबिम्ब हमेशा उल्टा बनता हैं एवं इसे पर्दे पर प्राप्त किया जा सकता हैं |
  2. यदि दो परावर्तित किरणें वास्तव में किसी बिंदु पर मिलती हैं परन्तु एक बिंदु पर मिलती  हुवी प्रतीत होती हैं तो इनके द्वारा काल्पनिक या आभासी प्रतिबिम्ब का निर्माण होता हैं एवं इन्हें पर्दे पर प्राप्त नहीं किया  सकता |

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#उत्तल दर्पण एवं अवतल दर्पण के लिए बिम्ब की भिन्न भिन्न स्थितियों पर प्रतिबिम्ब की स्थिति एवं प्रकृति –

 

उत्तल दर्पण एवं अवतल दर्पण के लिए बिम्ब की भिन्न भिन्न स्थितियों पर प्रतिबिम्ब की स्थिति एवं प्रकृतिphysics notes in hindi 12th Class भौतिक विज्ञान कक्षा १२

RBSE Class 12 Physics Notes in Hindi

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